मेरे होठों ने

मेरे होठों ने जब तेरे होठों को सहलाया था
गुलाब जैसे तेरे गालों पर उतर आया था।

बिखरे हुए वह तेरे गेसू, वह तड़पती सी बाहें
आँखों में उतरी लाली, सीने में सुलगती आहें
मेरे जिस्म ने तेरी रूह को बुलाया था।
मेरे होठों ने जब तेरे होठों को सहलाया था।

हया की कैद से आज़ाद तू मुझमें सिमट गई थी।
एक हसरत, एक चाहत से जैसे लिपट गई थी।
तेरा वजूद, मेरे वजूद में समाया था
मेरे होठों ने जब तेरे होठों को सहलाया था।